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मैं अपूर्ण हूँ

  • Feb 6
  • 1 min read

मैं अपूर्ण हूँ

धैर्य साहस प्रेम अभिमान

इन सबके बिना मैं कहाँ सम्पूर्ण हूँ


हाँ मैं अपूर्ण हूँ

शास्त्र शिक्षा दीक्षा परीक्षा

इन सबसे बहुत कुछ सीखना है


अभी तो मैंने सीखना प्रारम्भ किया

अक्षर साक्षर अलिख़ जुमला

धीरे धीरे अपने जीवन की गाथा लिखूँगा


अभी मैं अभिमन्यु हूँ

नवीन प्रवीण प्रस्फुटन यौव्वन

जीवन के सभी चक्रव्यूह बेधना सीखूँगा


अभी तो मैं कर्ण हूँ

कवच ढाल रक्षा सुरक्षा

इन सबको बेध कर अर्जुन बनूँगा


अभी तो मैं नंद हूँ

योग निरोग विराग वैराग्य

धीरे धीरे ही बढ़ूँगा आनंद में


अभी मेरे जीवन में कई वर्ण है

राग द्वेष कोप भोज

गिरूँगा पड़ूँगा तभी बनूँगा सम्पूर्ण मैं


अभी भटक रहा हूँ अरण्य में

नाश विनाश गम्भीर क्रूर

इन सबसे निकलकर भगवान के शरण्य में


अभी तो पकड़ा है ढाल मैं

छल कपट भेद धंभ

निश्चित सीखूँगा रण भूमि में


देखना कहाँ तक पहुँचूँगा मैं

कहाँ सीखा है जीवन के पहलुओं को

प्रयास कर करूँगा बनूँ स्वर्णमय




15 नवम्बर 2021

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