मैं अपूर्ण हूँ
मैं अपूर्ण हूँ
धैर्य साहस प्रेम अभिमान
इन सबके बिना मैं कहाँ सम्पूर्ण हूँ
हाँ मैं अपूर्ण हूँ
शास्त्र शिक्षा दीक्षा परीक्षा
इन सबसे बहुत कुछ सीखना है
अभी तो मैंने सीखना प्रारम्भ किया
अक्षर साक्षर अलिख़ जुमला
धीरे धीरे अपने जीवन की गाथा लिखूँगा
अभी मैं अभिमन्यु हूँ
नवीन प्रवीण प्रस्फुटन यौव्वन
जीवन के सभी चक्रव्यूह बेधना सीखूँगा
अभी तो मैं कर्ण हूँ
कवच ढाल रक्षा सुरक्षा
इन सबको बेध कर अर्जुन बनूँगा
अभी तो मैं नंद हूँ
योग निरोग विराग वैराग्य
धीरे धीरे ही बढ़ूँगा आनंद में
अभी मेरे जीवन में कई वर्ण है
राग द्वेष कोप भोज
गिरूँगा पड़ूँगा तभी बनूँगा सम्पूर्ण मैं
अभी भटक रहा हूँ अरण्य में
नाश विनाश गम्भीर क्रूर
इन सबसे निकलकर भगवान के शरण्य में
अभी तो पकड़ा है ढाल मैं
छल कपट भेद धंभ
निश्चित सीखूँगा रण भूमि में
देखना कहाँ तक पहुँचूँगा मैं
कहाँ सीखा है जीवन के पहलुओं को
प्रयास कर करूँगा बनूँ स्वर्णमय
15 नवम्बर 2021




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