आत्मीय शब्दों एवं कार्यों से अपना बना लेना स्वर्गीय श्री अजित जोगी, आईएएस का ही परिचय है |
Updated: Jan 12

स्वर्गीय जोगीजी से मैं कभी व्यक्तिगत मिला नहीं। परंतु जब भी उनका फ़ोन आया लगा की हमारा लम्बा परिचय रहा है। किसी काम के लिए ऐसे बात करते थे की इच्छा करती थी की तुरंत उस काम को करूँ। कभी भी उन्होंने यह महसूस नहीं कराया की वो एक वरिष्ट अधिकारी या बड़े राजनेता थे। शायद यह महसूस नहीं कराना ही व्यक्तित्व होता है ? आपके ओहदे से ज़्यादा आपका विनम्रतापूर्वक व्यवहार ही व्यक्ति याद रखता है।
मुझे दो ज़िलों में कलेक्टर रहने का सौभाग्य मिला जहां श्री जोगी भी कलेक्टर थे - सिंगरौली (सीधी) एवं इंदौर। दोनो ज़िलों में उनके लगबग २४-३० साल पहले कलेक्टर रहने के बावजूद अनेको प्रशंसक थे जो उनके कार्यशैली के चर्चे करते थे। सिंगरौली में भू अभिलेखों का सुधार, गरीब वर्ग को पट्टा बंटना एवं बड़ी परियोजनाओं के लिए भू-अर्जन में किसानो के हितों के संरक्षण करना हमेशा लोग याद करते रहें।
इंदौर में उनके द्वारा मिलों में चल रहे हड़ताल एवं क़ानून व्यवस्था जिस तरह से सम्भाला है उसकी चर्चा अनेकों से सुनी है। इंदौर में कलेक्टर रहते हुए मैंने तत्कालीन निगम कमिश्नर मनीष सिंह के साथ सी पी शेखर नगर में गंदगी में रह रहे लोगों को नए बने आवासीय योजना के अंतर्गत मकानों में शिफ़्ट करने के लिए पैदल सी पी शेखर नगर के गलियों में घुमे तो वहाँ के कुछ बुजुर्ग लोगों ने आत्मीय भाव से कहा “जब जोगी कलेक्टर थे तब कोई कलेक्टर आया था, बरसो बाद अब आप आए हो”।
भारतीय प्राथमिक सेवा के अधिकारियों के लिए मैदानी पोस्टिंग में ज़रूरतमंद, गरीब एवं निस्सहाय लोगों के लिए काम करने के अनेकों मौके मिलते है। आदरणीय जोगी जी ने एक आईएएस अधिकारी की हैसियत से उस वर्ग के दिलों में अपनी छाप छोड़ी है।
उन्हें विनम्र श्रधांजलि।
30th May 2020



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